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घर की गलियां बर्बाद कर देती हैंअच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं



घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

में इन गलियों का शिकार बन गया हूं ।
तभी तो ये कविता लिख रहा हूं ।
मेरी ना मानो तो उनसे पूछना ।
जिनकी घर में चलती कभी ना ।
वे तुमको सब सत्य बताएंगे ।
सभी लोग उनको पागल ठहराएंगे ।
ज्ञानी इंसान को गंवार बना देती हैं
घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

में घर वालों के लिए बोझ बन गया हूं ।
पूरा काम करता हूं फिर भी कमिना कहलाता हूं ।
अगर कहीं नौकरी के लिए जाता हूं ।
नसा नहीं करता फिर भी नसेडी कहलाता हूं ।
बेवकूफ नहीं फिर भी उल्लू बताया जाता हूं ।
पड़े लिखे इंसान को पप्पू बना देती हैं ।
घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं ।
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

10 वी पास करके जब में 11 में आया था ।
सुप्रीम कोर्ट का जज बनने की कामना ले आया था ।
गालियों ने मेरी जिंदगी झंड कर दी है ।
सारी सोची हुई कामना पानी में बह गई है ।
बुरी तरह हारकर में रोए जा रहा था ।
जज तो क्या चपरासी बनाना भी मुश्किल हो गया था ।
पाच वार चपरासी का interview दे चुका हूं ।
हर बार जज ने फेल कर दिया हूं ।
शराब नहीं पीता फिर भी शराबी बना देती है ।
घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

ये में नहीं मेरी हकीकत कह रही है
आप से मेरी आत्मा बोल रही है ।
में हारकर अपनों से नौकरी मांगता हूं ।
चेहरा सुंदर है फिर भी दिवालिया कहलाता हूं ।
सोचने वाले इंसान को सनकी बना देती हैं ।
घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं ।
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

आज भी मुझे गाली देते है घर वाले ।
बर्बाद कर दी है जिदंगी फिर भी नहीं मानते ।
गलियां खाने की मुझे आदत हो गई है ।
रोज मेरे लिए सुबह की चाय हो गई है ।
गालियां देकर उनके दिल को बहुत ठंडक मिलती है
पर मेरे दिल को चीरकर खोखला कर देती है ।
दिमाग में बहुत ज्यादा टेंशन बड़ा देती हैं ।
चाह कर भी में इस दुख को निकाल नहीं पता हूं ।
रात दिन ईश्वर को कोसता रहता हूं ।
बुद्धिमान इंसान को बुधू बना देती हैं
घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं
अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

 🙏लेखक -- अमित शर्मा सर🙏


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