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गंजो के गांव में कंघा बेचना

 बात बहुत पुरानी है जब मैं छोटा था तब एक दिन मुझे मेरे नाना ने बताया । और कहां के बेटे कभी भी लड़कर घर से बाहर रात को नहीं जाना चाहिए मैंने कहा क्यों ऐसा क्या हो जाएगा तो उन्होंने मुझे बताया कि एक बार मैंने ऐसी गलती की थी जिसे मैं तुम्हें बताता हूं बात 1964 की है जब मुरैना जिले में बारिश ना होने से कोई फसल नहीं हुई थी । और हम एक किसान धे जो अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर थे । जिले में अकाल पड़ने के कारण तुम्हारी नानी मुझसे रोज लड़ती थी कि ग्वालियर में जाकर उधार दिए हुए पैसों को वापस ले आओ क्योंकि मुझे बच्चों का पालन पोषण करना है मैं रोज-रोज के ताने से परेशान होकर एक दिन उधारी के पैसे लेने के लिए ग्वालियर की तरफ निकल पड़ा मैं जिस समय घर से निकला उस समय रात के 10:00 बज रहे थे । मैं अपनी घोड़ी पर सवार होकर निकलने लगा गांव से निकलने के बाद 2 किलोमीटर दूरी पर एक नहर बनी हुई है और समय नहर नई बनी थी उस पर पुल नहीं था सभी को नाहर के बीच में से निकल कर ही ग्वालियर की तरफ जाना पड़ता था मैं भी नहर के किनारे पहुंच गया और घोड़े की लगाम घुमाते हुए घोड़े को नाहर में उतरने के लिए इशारे करने ल...

घोड़े पर सवार मसान

 बात बहुत पुरानी है जब मैं छोटा था तब एक दिन मुझे मेरे नाना ने बताया । और कहां के बेटे कभी भी लड़कर घर से बाहर रात को नहीं जाना चाहिए मैंने कहा क्यों ऐसा क्या हो जाएगा तो उन्होंने मुझे बताया कि एक बार मैंने ऐसी गलती की थी जिसे मैं तुम्हें बताता हूं बात 1964 की है जब मुरैना जिले में बारिश ना होने से कोई फसल नहीं हुई थी । और हम एक किसान धे जो अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर थे । जिले में अकाल पड़ने के कारण तुम्हारी नानी मुझसे रोज लड़ती थी कि ग्वालियर में जाकर उधार दिए हुए पैसों को वापस ले आओ क्योंकि मुझे बच्चों का पालन पोषण करना है मैं रोज-रोज के ताने से परेशान होकर एक दिन उधारी के पैसे लेने के लिए ग्वालियर की तरफ निकल पड़ा मैं जिस समय घर से निकला उस समय रात के 10:00 बज रहे थे । मैं अपनी घोड़ी पर सवार होकर निकलने लगा गांव से निकलने के बाद 2 किलोमीटर दूरी पर एक नहर बनी हुई है और समय नहर नई बनी थी उस पर पुल नहीं था सभी को नाहर के बीच में से निकल कर ही ग्वालियर की तरफ जाना पड़ता था मैं भी नहर के किनारे पहुंच गया और घोड़े की लगाम घुमाते हुए घोड़े को नाहर में उतरने के लिए इशारे करने ल...

घर की गलियां बर्बाद कर देती हैंअच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं

 घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं में इन गलियों का शिकार बन गया हूं । तभी तो ये कविता लिख रहा हूं । मेरी ना मानो तो उनसे पूछना । जिनकी घर में चलती कभी ना । वे तुमको सब सत्य बताएंगे । सभी लोग उनको पागल ठहराएंगे । ज्ञानी इंसान को गंवार बना देती हैं घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं में घर वालों के लिए बोझ बन गया हूं । पूरा काम करता हूं फिर भी कमिना कहलाता हूं । अगर कहीं नौकरी के लिए जाता हूं । नसा नहीं करता फिर भी नसेडी कहलाता हूं । बेवकूफ नहीं फिर भी उल्लू बताया जाता हूं । पड़े लिखे इंसान को पप्पू बना देती हैं । घर की गलियां बर्बाद कर देती हैं । अच्छे भले इंसान को पागल बना देती हैं 10 वी पास करके जब में 11 में आया था । सुप्रीम कोर्ट का जज बनने की कामना ले आया था । गालियों ने मेरी जिंदगी झंड कर दी है । सारी सोची हुई कामना पानी में बह गई है । बुरी तरह हारकर में रोए जा रहा था । जज तो क्या चपरासी बनाना भी मुश्किल हो गया था । पाच वार चपरासी का interview दे चुका हूं । हर बार जज ने फेल कर द...

suman sanger

हैलो में सुमन सेंगर भोपाल से हूं । इस वीडियो को पूरा चलाने का सॉफ्टवेयर कंपनी ₹50 का रिचार्ज दे रही है Click करें 👇👇👇👇👇👇👇 Check out 50 Rs Free: https://t.me/GyanAaeena